‘पारो-पिनाकी की कहानी’: सीवर की जहरीली गैसों के बीच खिली एक अधूरी प्रेम कहानी, दिल को छू लेगी यह मार्मिक फिल्म

रेटिंग: ★★★ (3 स्टार)

मुंबई/दिल्ली, 6 फरवरी 2026: बॉलीवुड में जहां बड़े-बड़े बजट और स्टार-पावर वाली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही हैं, वहीं एक छोटी लेकिन दिल से बनी फिल्म ‘पारो-पिनाकी की कहानी’ आज थिएटर्स में रिलीज हुई है। यह फिल्म सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि समाज के उन अनदेखे कोनों की सच्चाई है जहां सीवर कर्मी रोज मौत के मुंह में जाते हैं और उनकी जिंदगी को कोई नहीं देखता।  

फिल्म की लीड एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर ईशिता सिंह (राज्यसभा सांसद संजय सिंह की बेटी) ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर इस संवेदनशील मुद्दे पर फिल्म बनाई है। ईशिता ने कहा, “यह फिल्म सिर्फ लव स्टोरी नहीं है, बल्कि उन तबकों की असली जिंदगी दिखाने की कोशिश है जिनकी बातें सिनेमा में शायद ही कभी होती हैं। हमने सीवर कर्मी और सब्जी बेचने वाली की सच्ची जिंदगी को बिना मेकअप के पर्दे पर उतारा है।”  

कहानी का सार

मुंबई की एक झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली मरियम उर्फ पारो (ईशिता सिंह) अपने पिता के साथ बाजार में सब्जी बेचती है। पास की कॉलोनी में रहने वाले पिनाकी (संजय बिश्नोई) से ट्रेन के बाथरूम में गुप्त मुलाकातों के दौरान उनका सच्चा प्यार पनपता है। पारो घर से खाना लेकर पिनाकी से मिलने जाती है, लेकिन उसके पिता को यह रिश्ता मंजूर नहीं। वह पारो को मानव तस्करी के गिरोह को बेच देते हैं। पिनाकी अपना सब कुछ भूलकर अपनी प्रेमिका की तलाश में निकल पड़ता है। क्या उसकी तलाश कामयाब होती है? क्या यह प्रेम कहानी अपना अंजाम पाती है? यह जानने के लिए फिल्म देखनी होगी।  

फिल्म सीवर कर्मियों की जहरीली गैसों से मौत, गरीबी, जातिवाद, महिला शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों को एक सादगी भरी प्रेम कहानी के जरिए उठाती है। ट्रेन के बाथरूम में मिलने वाली मुलाकातें, चुपके-चुपके का प्यार और फिर बिछड़ने का दर्द – सब कुछ इतना रॉ और रियल है कि दर्शक खुद को कहानी में पा लेगा।  

परफॉर्मेंस और निर्देशन

ईशिता सिंह ने बिना मेकअप, नैचुरल लुक में पारो का किरदार निभाया है – उनकी ईमानदारी और इमोशनल डेप्थ फिल्म की जान है। कई क्रिटिक्स इसे उनकी अब तक की सबसे ईमानदार परफॉर्मेंस बता रहे हैं। संजय बिश्नोई पिनाकी के रोल में पूरी तरह ढल गए हैं, हालांकि कुछ दृश्यों में थोड़ी कमजोरी दिखी, लेकिन उनका कमिटमेंट साफ नजर आता है।  

लेखक-निर्देशक रुद्र जादौन ने सीमित बजट में ज्यादातर आउटडोर लोकेशन्स पर शूटिंग की है, जो कहानी की सच्चाई को और बढ़ाता है। संगीत ब्रिटो का है, जो फिल्म के मूड को सूट करता है। फिल्म की लंबाई 94 मिनट है, सेंसर U।  

क्यों देखें यह फिल्म?

अगर आप सच्चाई से जुड़ी, सोशल मैसेज वाली फिल्में पसंद करते हैं – जैसे श्याम बेनेगल या अनुराग कश्यप की स्टाइल – तो ‘पारो-पिनाकी की कहानी’ आपके लिए है। यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करेगी कि हम रोज अखबार में सीवर कर्मियों की मौत की खबर पढ़कर पन्ना पलट देते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की दास्तां क्या है?  

ट्रेड रिपोर्ट्स और क्रिटिक्स से मिली-जुली प्रतिक्रिया है – कुछ इसे ‘हार्ट इन द राइट प्लेस’ लेकिन ‘कॉन्फ्यूज्ड स्क्रीनप्ले’ बता रहे हैं (टाइम्स ऑफ इंडिया: 2.5/5), वहीं फिल्मफेयर ने इसे 3/5 देकर ‘सोशल कांशस लव स्टोरी’ कहा है। लेकिन ईशिता सिंह की परफॉर्मेंस और फिल्म का इरादा सबसे मजबूत है।  

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