नई दिल्ली : अलीपुर स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के छह डीबीएन इकाई ने दशहरा के अवसर वेबिनार के जरिए “ड्रग मिनेक” पर जागरूकता अभियान चलाया गया। जिसमें रावण को नशीली दवाओं का रुपक बताकर, इससे मुकाबला करने पर जौर दिया गया है। 26 जून ड्रग एब्यूज और इलिसिट ट्रैफिकिंग के खिलाफ अंतराष्ट्रीय दिवस के रूप में जाना जाता है। इस वेबिनार का उद्घाटन कमांडिग आॉफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल मुकेश कुमार के सम्मान के साथ किया गया है। इस वेबिनार में बताया गया कि नशीली दवाओं के प्रभाव, ज्ञान और समझ पर जोर देने से विश्व दवा समस्या में सुधार हो सकता है।
इस जागरूकता अभियान के माध्यम से कई एनसीसी कैडेट ड्रग मासिक धर्म के बारे में जान पा रहे हैं, तो कई एनसीसी कैडेट को 6 डीबीएन एएनओ और पीआई स्टाफ के तहत ड्रग मिनेक के बारे में जागरूकता मिलती है।
वेबिनार में मौजूद स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रवीण गर्ग ने ऐसे मुद्दों को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल करने से लेकर इसके प्रभाव और नशामुक्ति पर भी ध्यान केंद्रित किया। लेफ्टिनेंट मुकेशा राणा, एएनओ स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज जैसे आयोजक का मानना है कि ड्रग मिनेक एक परिवार, समाज और यहां तक कि एक देश को भी उजाड़ सकता है और सौशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता करने पर, इस तरह की बीमार प्रथाओं पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एएनओ हुड्डा के अनुसार तनाव बस्टर, बेरोजगारी, सहकर्मी दबाव, पीड़ित और अभाव जैसे कारक दवा के झुकाव के कुछ कारण हैं। पूर्व एएनओ वाई.के शर्मा ने कहा कि एक बेहतर नशा मुक्त समाज के लिए कानूनी प्रणाली की खामियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना बेहद जरूरी हैं। 6 डीबीएन से एसएम राजेंद्र सिंह, सूबेदार मैडम का कहना है कि समाज को यह समझने की जरूरत है कि नशा करने वाले पीड़ित हैं, अपराधी नहीं।


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